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सती और पार्वती की कहानी

  • gokahaani
  • Jan 6
  • 2 min read
Shiv carrying Parvati after she immolates herself in the Sacrificial fire of the yagya organised by her father- Daksha

हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण भाग हैं और इनकी कथा का गहरा संबंध भगवान शिव के साथ है। सती और पार्वती, दोनों ही एक ही देवी हैं, लेकिन उनका जन्म और जीवन विभिन्न रूपों में हुआ। यहाँ हम सती और पार्वती के जीवन और उनके विवाह की विस्तृत कथा बताएंगे।


सती का जन्म और शिव के साथ विवाह:

सती का जन्म दक्ष प्रजापति और उनकी पत्नी प्रसuti से हुआ था। वे एक बहुत ही योग्य और धार्मिक कन्या थीं। दक्ष प्रजापति ने अपनी बेटी सती के लिए बहुत अच्छे जीवनसाथी की खोज की थी, लेकिन उनका दिल हमेशा भगवान शिव की ओर खिंचता था। सती भगवान शिव को अपने जीवन साथी के रूप में चाहती थीं, जबकि उनका पिता दक्ष शिव को उपेक्षित और अव्यवस्थित मानते थे।


एक बार दक्ष ने एक यज्ञ आयोजित किया और सभी देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। सती ने जब सुना कि उनके पिता ने शिव को यज्ञ में नहीं बुलाया, तो वह बहुत दुखी हुईं और शिव से इस बारे में बात की। भगवान शिव ने सती को समझाया कि उन्हें अपने पिता की इच्छा का सम्मान करना चाहिए, लेकिन सती अपने पिता के घर जाने के लिए अड़ी रही।


सती ने बिना शिव की अनुमति के दक्ष के यज्ञ में जाने का निश्चय किया। जब वह यज्ञ में पहुंची, तो दक्ष ने उन्हें अपमानित किया और भगवान शिव के बारे में ताने दिए। यह सुनकर सती बहुत आहत हुईं और क्रोध के मारे उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। सती का त्याग भगवान शिव के लिए एक गहरी वेदना का कारण बना, और उन्होंने शोक के मारे क्रोध में आकर तपस्या शुरू की।


सती के पुनर्जन्म के रूप में पार्वती

सती के शरीर का त्याग करने के बाद भगवान शिव शोक में डूब गए थे। तब, देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से निवेदन किया कि वह फिर से संसार के पालन हेतु पत्नी प्राप्त करें। इसके बाद, सती का पुनर्जन्म हिमालय और उनकी पत्नी मेनका के घर हुआ। इस जन्म में वह पार्वती के रूप में प्रकट हुईं।


पार्वती बचपन से ही बहुत सुंदर और धार्मिक कन्या थीं। बचपन में ही उनकी नज़रे भगवान शिव पर थीं और वह उन्हें अपना जीवनसाथी मानती थीं। पार्वती के पिता हिमालय ने एक बार भगवान शिव से विवाह के लिए उनकी इच्छा व्यक्त की, लेकिन शिव ने उन्हें उपेक्षित किया और तपस्या में लीन रहे। पार्वती ने भगवान शिव को आकर्षित करने के लिए कठोर तपस्या शुरू की।


पार्वती की तपस्या को देखकर भगवान शिव प्रभावित हुए और उन्होंने पार्वती से विवाह करने का निर्णय लिया। भगवान शिव ने पार्वती से विवाह किया और वे दोनों एक अद्वितीय जोड़ी बने। इस प्रकार, पार्वती ने सती के रूप में भगवान शिव से पुनः विवाह किया और उनके साथ एक सुखमय जीवन बिताया।

 
 
 

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